Ajeeb – O – Gareeb Lyrics By Arijit Singh

अजीब – ओ – गरीब
तरकीब लगाए नसीब
अजीब – ओ – गरीब
तरकीब लगाए नसीब
अजीब – ओ – गरीब
हाथों की लकीरों को घुमा दिया
मिलना नहीं था मिलवा दिया
ले ही आया दोनों को करीब
अजीब – ओ – गरीब
तरकीब लगाए नसीब
अजीब – ओ – गरीब
हैं नादान थोड़े थोड़े से नकचढ़े
चौखट पे हम जवानी की दोनों हैं खड़े, हैं खड़े
हैं जिनके मोहल्ले ज़मीन पे तो जुदा
फिर भी पतंगों जैसे हवा में हैं लड़े, हैं लड़े
हुए हमदम, हमदम थे कल ही तलक जो रक़ीब
अजीब – ओ – गरीब
तरकीब लगाए नसीब
अजीब – ओ – गरीब
हाए हाथों की लकीरों को घुमा दिया
मिलना नहीं था मिलवा दिया
ले ही आया दोनों को करीब
अजीब – ओ – गरीब
(अजीब – ओ – गरीब)
तरकीब लगाए नसीब
अजीब – ओ – गरीब
उड़न-छू हुई सी सारी नाराज़ी है
हम उनसे हो चुके हैं वो हमसे राज़ी हैं
कभी आँख फूटी जिनको ना भाते थे
अब देखो हम से हारे वो दिल की बाज़ी हैं
इश्क हुआ तो आने लगी तहज़ीब
अजीब – ओ – गरीब
तरकीब लगाए नसीब
अजीब – ओ – गरीब
हाथों की लकीरों को घुमा दिया
मिलना नहीं था मिलवा दिया
ले ही आया दोनों को करीब
अजीब – ओ – गरीब
(अजीब – ओ – गरीब)
तरकीब लगाए नसीब
अजीब – ओ – गरीब